वर्तमान की खराब शिक्षा पद्धति
वर्तमान मैं पढ़ने-लिखने का मतलब कुर्सी पर बैठ कर आदेश देना हो गया है पढ़े-लिखे लोगों को काम करने में लज्जा का अनुभव होता है इसलिए समाज की हालत दिनोंदिन खराब होती जा रही है बुद्धि और हाथ का उपयोग सम्यक रूप से नहीं हो पा रहा है इसे भारत का ही नहीं पूरे विश्व का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आज ज्ञान और कर्म के बीच मेलजोल खतम हो गया है काम करने वाले के पास ज्ञान नही पहुँचता और ज्ञानी काम करना नहीं चाहता है जो लोग पढ़ार्इ करते हैं, वे ठंड, गर्मी, तथा बरसात की मार नहीं झेल सकते हैं जरा सा कुछ करना पड़ जाए तो बीमार हो जाते हैं या थक जाते हैं इसका परिणाम यह हुआ कि आज के शिक्षित लोग गूढ़ अनुभव को समझ नही पाते हैं ऊपरी तौर पर देखने पर लगता है कि आजकल चारो ओर शिक्षा का विस्फोट हो रहा है सभी पढ़-लिख कर नौकरी चाहते हैं, जिसके कारण सरकार के सामने भी विकट समस्या खड़ी हो गर्इ है आजकल विद्यार्थी, विद्यार्थी न रहे, परीक्षार्थी हो गये हैं वे साम-दाम-दंड-भेद अपना कर किसी तरह अधिक से अधिक अंक प्राप्त करना चाहते हैं जिसके कारण वे सच्चा ज्ञान प्राप्त करने से वंचित हो जाते हैं आजकल हम ज्ञान के बज...